बुंदेलखंड तत्त्व प्रचार समिति अमरमऊ

01.आत्मा ही सुखधाम है
                        
                          आत्मा में ही भरे है अनन्तो गुण अहो
                            तम नहीं है बस उजाले को ही गहो
                       मत करो पुरुषार्थ पर में आत्मा ही है सुखी 
                   हीन मत हो बस करो तुम आत्मा में पुरुषार्थ सही
                     सुख भरा है जिसमे देखो सुख की जो खान है 

खग मग चाहे हो कोई भी सबकी आत्मा सामान है
धाम है सुख आनंदमय सभी जीवो को बह प्राप्त हो
मत डरो कर्मो से तुम,तुम तो ही शकिमान हो
है यही सुख मया दशा आत्मा ही सुखधाम है
केवल ज्ञान  और सिद्ध दशा सब अभी आतम में विधमान है  




02.मुनिराजो को बंदन हो
 


मुनि जीवन तो धन्य अहो निज स्वभाव व्यापार है
निज अनुभव ही काम है पञ्च प्रभु ही जिनका धाम है
राग द्वेष कषायो का जिनके न किंचित काम है
जो भव का अभाव करने को निज में किया विश्राम है
कोई न इस जग में भटके भावना जिसकी निष्काम है
बंध होय न कर्म किसी को आत्मा है सुख धाम है
दस धर्मो का चिंतन और अनुभव में अतम राम है
नष्ट करेगे सब कर्मो का संसार का काम तमाम है
हो जायेगे परम सुखी बह सिदशिला उनका धाम है 
 

My Blog List

Footer

About me

View my complete profile
बुंदेलखंड तत्त्व प्रचार समिति अमरमऊ
यदि आप हमारे ब्लॉग पर visit करते हैं. तो कृपया blog followers जरूर बने. इसके लिए ब्लॉग पेज पर दिए follow विकल्प पर क्लिक कर निर्देश अनुपालन करें.साथ ही साथ आपके बहुमूल्य comments भी देना न भूले.... धन्यवाद जय जिनेन्द्र